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अपने माइनस पॉइंट पता होना सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है...

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निदंक नियरे राखिए , आंगन कुटी छवाय , बिन पानी , साबुन बिना , निर्मल करे सुभाय ...  मिडिल स्कूल में पढ़ाया जाने वाला यह दोहा अपने अंदर काफी गहराई लिए हुए है। जीवन में इंसान को हमेशा अपनी प्रशंसा सुनना पसंद होती है और अपनी निंदा करने वाले लोगों को वह पसंद नहीं करता लेकिन कबीर दास जी ने इस दोहे के माध्यम से बताया है कि जो हमारी निंदा करते हैं वे हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। हमें निंदकों को अपने पास रखना चाहिए , जिससे वे हमारी कमियां बनाएं और उनमें सुधार कर हम अपने स्वभाव को बेहतर बना सकें। दोस्तों जीवन की एक महत्वपूर्ण बात इससे परिभाषित होती है कि अगर हमें अपने माइनस पॉइंट पता हैं तो यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। यह बात तो हम सभी मानते हैं कि  प्रशंसा   सभी को पसंद आती है और निंदा से सभी लोग दूर भागते हैं लेकिन अंग्रेजी में एक शब्द है कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज्म यानी रचनात्मक अलोचना। जी हां अगर आप अपने जीवन में...